Poetry

नींद

नींदियन तू आजा, पलकों में समा जा,

रात फिर आई, लोरी तो सुना जा |

याद फिर आई, माँ की कहानी,

कहती थी वो भी, परियो की ज़ुबानी ||

डाँट भी खाई, पापा से सारी,

फिर मन ही मन मुस्कुरा दी, इठलाती सी नादानी |

भाई ने सुनी, जो डाँट थी हमारी,

कह कर टाल दिया उसने, तू तो है पराई ||

आज फिर आई, वही चौबारे से महक,

खेल कर गवाई, जहाँ सारी जवानी |

रात के सन्नाटे ने, फिर यादें परोसी,

उन्ही के सहारे, अब नींद है आई ||

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8 thoughts on “नींद

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